Monday, December 27, 2010

झलख़

Courtesy - Google.
खुदा से ही बेवफायी कर बैठे हम,
न चाहते हुए भी तुझसे ही मोहब्बत
कर बैठे सनम!
दिल देना चाहा किसी ओर को
मगर, जान लुटाने लगे तुझपे ही
मेरे हमदम

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दिल कहता है,
नसीब हो तुम मेरे?
मन समझाता है....
तू नसीब है किसी और का!

-तेजस्विनी

4 comments:

VH said...

Google has no courtesy for anybody to provide the pictures. It is a search engine ;) Mention the website name.

तेजस्विनी said...

Mr VH

Thank you for ur valuable suggestion. Hope u enjoyed my poem very much! (You did master in Hindi right?:))

ಜಲನಯನ said...

तॆजस्विनिजी
इसी लिये कह्ते हैं
फूल खिल जाते हैं किलाये नही जाते
दिल मिल जाते हैं मिलाये नहिं जाते
वरना उन दोनॊं कॊ मना भी किया था रब ने
खा के फल मिल गये दिल
जन्नत से वरना गिराये नहीं जाते

अच्छी है आपकी कविता पसंद आये यह पंक्तियां
दिल कहता है,
नसीब हो तुम मेरे?
मन समझाता है....
तू नसीब है किसी और का!

Suparna Bhat said...

Wah Wah!