![]() |
[http://www.thecreativenut.co.uk/] |
तुम मेरे पास नहीं थे तो
कभी कुछ कहने केलिये
मैं तेरे पास नहीं थी
कभी कुछ में ही
सब कुछ कहकर
चुप रही में तो
कभी सब समझकर भी
अन्जान बने रहे तुम भी
यह कैसी पहेली है?! जो
हर दिन हर पल उलझरही है!
हर वक्त यही प्रश्न उठे मन में.... जो
चुपकर चुभरही है बनकर एक नासूर!
-तेजस्विनि
5 comments:
kuch keha naa paye aur aap kuch sunan paaye yahi hai ek pyar aur ek thukaraav ... tumhari kavita to bahut achchi hai madam ji
very nice teju.....
बहुत अच्छा है
wah !
super aagide kavite.
Post a Comment