Thursday, March 5, 2009

सपना

एक हसीन शाम थी
जब हमने याद किया
आपको, आपके यादों को
निशा कि नशे की तरह...
होठों पे खीली ती मुस्कान तब
एक कली की तरह

दिशा दिशा में बिखरी हुई थी
साँझ के हसीन किरणें
तारों के साथ हँसरहा था
चाँद बी नीले गगन में


खुलगये हमरे आँखें तो
चुभगयी सूरज की किरणें
न वह शाम था, न वह तारें थी
न आप थे पास, न वह हकीकत थी!!!!

10 comments:

Amit said...

नमस्ते तेजस्विनि,
मॆरी ये पेहली भेंट है आपके ब्लाग मैं । बहुत हि अच्छी है कल्पना आपकी । आखरी पंक्ती मै जॊ आपने लिखा हैं - " न वह हकीकत थी " , यहा वह का अर्थ पूरी कविता की कल्पना या और कुछ, ऐसे ही पूछना था ।

एक सूरज की किरणॆं हुआ तो अच्छा होता सूरज के किरणॆं के बदले मैं ।
और एक बात हैं - न वह तारा था- यहाँ तारें होने चाहिये , या चांद . क्षमा कीजिये गा मैं आपकी कविता हि बदलने की राय दे रहां हूं ऐसी लगे तॊ । :-) ।

Amit said...

आपने सुना नहीं है तो एक गीत ज़रूर सुनियीगा , आपकॊ नही मिला तॊ मुझॆ कहिये मै भेज दूंगा \ amith.kh@gmail.com
मूवि - बाज़ार
गीत - दिखायी दिये युँ, के बेखुद किया

शायद आपने सुना होगा फिर भि आपके कविता पढ कर याद आगयी वो गीत |

Amit said...

आपने सुना नहीं है तो एक गीत ज़रूर सुनियीगा , आपकॊ नही मिला तॊ मुझॆ कहिये मै भेज दूंगा \ amith.kh@gmail.com
मूवि - बाज़ार
गीत - दिखायी दिये युँ, के बेखुद किया

शायद आपने सुना होगा फिर भि आपके कविता पढ कर याद आगयी वो गीत |

तेजस्विनी said...

नमस्कार अमित जी.

आपके अनमोल सुझावों केलिये मैं बहुत बहुत आभारी हूँ.

मैं ने वह गाना नही सुना है. अगर हो सकेतो मुझे भेजदीजियेगा. आपका बहुत शुक्रिया.

ऐसेही आते रहियेगा. आपके सुझावॊं का इन्तज़ार रहेगा हमें.

तेजस्विनी said...

"पूरी कविता ही एक हकीकत है"- यह भी सोच सकते हो आप. या.. "मेरा वह सपना ही एक सपना था.. सिर्फ एक सपना..." ऐसेभी सोच सकते हॊ आप..:)

Amit said...

नमस्ते, अमित के बाद जी की अवश्यकता नहीं हैं । :-) गीत कॊ कहाँ भेजूं । मेरि ईमैल आई डी इसी लियी दिया था । , इस वाक्यॊंको डिलीट कर दीजियी इस मै कविता के ऊपर कमॆंट नहीं हैन न इस लिये :-) आपकी ईमैल आई डी देंगी तो मैं गीत कॊ भेज सकता हूं ।

ಜಲನಯನ said...

केह्ते हैं अक्सर के दक्षिण वाले हिन्दी से चिढते हैं, क्यॊंकी वह न बोल पाते हैं न लिख पाते हैं, इसका अपवाद हो आप तेजस्विनिजी , आप्के कन्नड की तरह हिन्दी भी सठीक और लज्जतदार है..लगे रहीये...हमारी शुभकामनायें आप्के साथ हैं

तेजस्विनी said...

आझाद जी,

पचंमि केलिये आपका स्वागत है ।

हमतो पहले भारत वासी हैं । फिर क्या दक्षिण.. क्या उत्तर ? :) आपके शुभकामनाओं केलिये बहुत शुक्रिया. पंचमि से लगाव ऎसेही बनाये रखियेगा जनाब :)

ಸೀತಾರಾಮ. ಕೆ. said...

NICE ONE

तेजस्विनी said...

fghfh